एक अधिकारी की सोच ने बना दिया ऑपरेशन चतुर्भुज , जो पूरे देश में काम आयगा
क युवा अधिकारी जो कि सोच रखते है बेहतर कल की , और बेहतर कल संभव होता है बदलाव और सही दिशा में किये गए कार्यो से , हम बात कर रहे है मुख्य विकास अधिकारी लखीमपुर अरविन्द सिंह की जो २०१५ बैच के अधिकारी है इन्होने पहले 'ऑपरेशन कवच' को उस मुकाम तक पंहुचा दिया

एक अधिकारी की सोच ने बना दिया ऑपरेशन चतुर्भुज , जो पूरे देश में काम आयगा

एक युवा अधिकारी जो कि सोच रखते है बेहतर कल की , और बेहतर कल संभव होता है बदलाव और सही दिशा में किये गए कार्यो से , हम बात कर  रहे है मुख्य विकास अधिकारी लखीमपुर अरविन्द सिंह की जो  २०१५ बैच के अधिकारी है इन्होने पहले 'ऑपरेशन कवच' को उस मुकाम तक पंहुचा दिया कि पूरे दर्श में इस 'ऑपरेशन कवच'की चर्चा हुयी , अब बात हो रही है ऑपरेशन चतुर्भुज  की 

लॉकडाउन का दूसरा चरण जब शुरू हुआ तब  सरकार ने गावों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत कार्य करवाने की अनुमति दे दी थी. अरविंद जब आइएएस के रूप में पहली पोस्टिंग बुलंदशहर के ज्वाइंट मैजिस्ट्रेट के रूप में तैनात थे तब उन्होंने देखा कि तहसील दिवस पर सबसे ज्यादा शिकायत गांव में चक रोड पर अवैध कब्जे की आती थी. छोटे-छोटे काश्तकारों को अपने खेत की पैमाइश कराने के लिए तहसील के चक्कर काटने पड़ रहे थे. इन दोनों समस्याओं का निराकरण करने के लिए अरविंद ने लखीमपुर में इसी वर्ष जनवरी में चार स्तरीय रणनीति वाली योजना 'ऑपरेशन चतुर्भुज' शुरू करने के बारे में सोचा

इसके बाद इन्होंने राजस्व और चकबंदी विभाग से पूरे जिले का सघन सर्वे कराया. ऐसे सेक्टर मार्ग और चक मार्ग थे जो सरकारी अभिलेखों में तो दर्ज थे लेकिन मौके पर कभी बने नहीं. लखीमपुर के परसा गांव में इस सर्वे का पायलट अभियान शुरू किया. इस अभियान में पाया गया कि परसा गांव में कुल पचास किलोमीटर लंबे चक मार्ग ओर सेक्टर मार्ग ऐसे हैं जो दस्तावेजों में तो दर्ज हैं लेकिन मौके पर नहीं हैं. इन मार्गों पर अवैध कब्जे थे. अरविंद ने गांव के लोगों से बातचीत करके उन्हें अवैध कब्जे से हो रहे नुकसान के बारे में बताया और उन्हें खुद कब्जा हटाने के लिए प्रेरित किया. लॉकडाउन के पहले 16 मार्च तक परसा गांव में आठ किलामीटर रोड पर से कब्जा हटाकर उसे बनाया जा चुका था.

लॉकडाउन में गांव में बेरोजगारी और बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों के आने से उनके रोजगार की समस्या सामने थी. लॉकडाउन के दौरान अरविंद ने पूरे जिले के सर्वे और मनरेगा के तहत लोगों को रोजगार देने का एक खाका खींच लिया था. पूरे जिले में अवैध कब्जे वाले 2,500 किलोमीटर लंबे सेक्टर मार्ग और चकमार्ग को चिन्हित कर लिया था. 21 अप्रैल को जैसे ही मनरेगा के तहत सरकार ने काम करवाने की अनुमति दी ऑपरेशन चतुर्भुज को पूरे लखीमपुर जिले में लागू कर दिया. पहले ही दिन 21 अप्रैल से लखीमपुर यूपी में मनरेगा के तहत में सबसे ज्यादा रोजगार प्रदान करने वाला जिला बन गया.

इन सेक्टर और चक मार्ग पर नरेगा से मिट्टी की रोड बनाने के लिए बड़ी संख्या में गांव के मजदूर लगाए गए. इन्हें 202 रुपए रोज मजदूरी दी गई. आलम यह था कि ऑपरेशन चतुर्भुज के पायलट प्रोजेक्ट वाले गांव परसा में पिछले वर्ष अप्रैल में जहां केवल पचास मजदूर ही मनरेगा के तहत काम कर रहे थे वहीं इस बार यह आंकड़ा छह सौ को पार कर गया. हर बनने वाले रोड पर सीमेंट का 'सिटिजन इनफार्मेंशन बोर्ड' तैयार करने का जिम्मा एनआरएलएम की 'सेल्फ हेल्प ग्रुप' की महिलाओं को दिया गया. इस एक बोर्ड को तैयार करने पर महिला को नौ सौ रुपए की आमदनी हुई.

इसके अलावा वे किसान जिन्होंने सरकारी जमीन पर कब्जा किया हुआ था उस पर स्वेच्छा से कब्जा हटा देने पर उस सड़क को बनवाने और मनरेगा के तहत व्यक्तिगत लाभार्थ जैसे बकरी पालन, मुर्गी पालन के लिए ‘कैटल शेड’ जैसे ‘इनसेंटिव’ भी दिया गया. इन प्रयासों से लखीमपुर में एक लाख 25 हजार लोगों को मनरेगा के तहत रोजगार मिल रहा है जोकि प्रदेश में सबसे अधिक है. ऑपरेशन चतुर्भुज ने राजस्व, चकबंदी, पुलिस, पंचायत और विकास विभाग के सामंजस्य का अनोखा उदाहरण पेश किया. पांच मई को ग्राम्य विकास विभाग के शासनादेश में एक प्रस्तर लखीमपुर खीरी में ऑपरेशन चतुर्भुज के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को मनरेगा के तहत मिले रोजगार पर भी लिखा गया है.

ऑपरेशन चतुर्भुज – खीरी, Operation Chaturbhuj / Op. Quadrangle - Kheri, A MGNREGA led Multi-Solution

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