सफलता के लिए समय की प्रतिबद्धता और अपने कार्यों की जानकारी के साथ आत्मविश्वास बहुत जरूरी है-- अर्चना शुक्ला
मूल रूप से प्रयागराज उत्तर प्रदेश की निवासी उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद उन्होंने अपना प्रोफेशनल कैरियर शुरू किया

सफलता के लिए समय की प्रतिबद्धता और अपने कार्यों की जानकारी के साथ आत्मविश्वास बहुत जरूरी है-- अर्चना शुक्ला

मूल रूप से प्रयागराज उत्तर प्रदेश की निवासी उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद उन्होंने अपना प्रोफेशनल कैरियर शुरू किया अपने बेहतर कार्य प्रदर्शन के कारण और जीवन मे कठिन संघर्ष करते हुए उन्होंने कई सफलताएं हासिल की इन दिनों  समाजसेविका होते हुए सक्रिय रूप से राजनीति के क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के महिला मोर्चा के काशी क्षेत्रीय मंत्री होते हुए सक्रिय रुप से समाज और राष्ट्र के लिए अपना योगदान दे रही है एक शिक्षिका होने के साथ-साथ उनमें बहुत सारी खूबियां हैं योग शिक्षिका समाज सेविका सांस्कृतिक क्षेत्र, बौद्धिक क्षेत्र, शैक्षिक क्षेत्र, राजनीतिक क्षेत्र के साथ-साथ अपने मिशन में लगातार कार्य कर रही हैं भारत में स्वास्थ्य से पीड़ित गरीब घर की महिलाएं हो या बच्चों की मूलभूत शिक्षा से संबंधित आवश्यकता हो लगातार उन्हें सरकारी योजनाओं के साथ-साथ अपनी सेवा से भी लाभान्वित कर रही हैं अपनी सरलता और विशेषता से लगातार समाज को प्रदर्शित कर रही हैं !!

प्रश्न-1-आपने कौन-कौन से शिक्षण संस्थानों से शिक्षा हासिल की?

उत्तर-1- मैंने अपनी पढ़ाई इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रयागराज से पोस्ट ग्रेजुएशन करने के पश्चात इग्नू से B.Ed अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र  व योग में मास्टर डिग्री करने के बाद 16 साल शिक्षण कार्य में अपनी सेवा दी इसके साथ साथ कुछ हटकर समाज के लिए मेरी रुचि थी पढ़ाई के क्षेत्र में रहते हुए कुछ अलग कर सकूं अपनी एनजीओ अर्पित सेवा संस्थान के माध्यम व अन्य बहुत सी संस्थाओं के साथ  व अन्य राष्ट्रीय संगठनों के माध्यम से स्वदेशी जागरण मंच के विभाग महिला प्रमुख के रूप में और भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय सदस्य होने के नाते लगातार सामाजिक रूप से भी अपनी गतिविधियां जारी रखें !!

 प्रश्न 2 - शिक्षा हासिल करने के बाद नौकरी करने का फैसला आपका अपना था या किसी ने प्रेरित किया? 

उत्तर 2- शिक्षा हासिल करने के बाद हर कोई चाहता है आत्मनिर्भर बनना आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना । अपनी योग्यता को अपने जीवन में संवारने के लिए माता-पिता सास-ससुर पति यह सभी मेरी प्रेरणा के सफलता के आधार हैं विवाह के पश्चात मैंने लगातार शैक्षिक जीवन में और शैक्षणिक परिवार में रहते हुए 16 साल शिक्षा के क्षेत्र में कार्य किया नौकरी की एक लड़की होकर नौकरी करने के मेरे फैसले का बहुत से लोगों ने विरोध भी किया लेकिन मुझे पूरा आत्मविश्वास था कि मैं अपनी योग्यता एक सफल प्रोफेशनल के रूप में साबित कर सकती हूं परिवार से निकल कर एक नई जगह पर काम करना मेरे लिए एक बहुत बड़ा चैलेंज था जब मैंने शिक्षा पूरी की और नौकरी के दौरान भी लगातार भी  शिक्षा प्राप्त करती रही उस दौरान बहुत जीवन के बहुत से उतार चढ़ाव से परिचय हुआ ।।

प्रश्न 3 - महिलाओं को लेकर समाज में थोड़ा रूढ़िवादी परंपरा को तोड़ते हुए व  अपने कैरियर के सफर के बीच में तमाम कठिनाइयों के भावनाओं से भी रूबरू हुई तो वहाँ प्रोफेशनल वर्किंग वूमेन के प्रति कैसा नजरिया होता था ?

उत्तर 3-  मेरी परवरिश जिस परिवार में हुई वह सब संस्कारों वाले और एक दूसरे के सहयोगी और एक दूसरे का सम्मान करते थे लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में वहां पर वह माहौल नहीं था ऐसे में वहां उस पारिवारिक माहौल में जहां पर लड़की की शादी कर देना की सही उद्देश्य समझा जाता था सहयोग माता-पिता का रहता भी था लेकिन रूढ़िवादी एक सोच के कारण माता-पिता सामाजिक दायरों से भी मजबूर रहते थे ऐसे में शिक्षा प्राप्त करने के लिए भी लगातार स्वयं से संघर्ष और परिवार से संघर्ष का सफर जारी रहा पारिवारिक दायरे से बाहर निकल कर विवाह के पश्चात जब मैं अलग-अलग तरह के लोगों के बीच में आई तो मुझे यह एहसास हुआ कि दुनिया में अच्छे के साथ बुरे लोग भी होते हैं जो आपकी तरक्की में बाधा डालते रहते हैं ऐसे लोग भी बहुत से हैं जो आपके सामने नाटकीय रूप से अच्छे बनने की कोशिश करते हैं लेकिन वास्तविकता कुछ और होती है शिक्षा के क्षेत्र में शुरुआत में अच्छे और कड़वे दोनों अनुभव मुझे प्राप्त हुए प्रोफेशनल वर्किंग में मेरा प्रारंभिक अनुभव कुछ ऐसा रहा कि कुछ स्वार्थी लोगों ने जिन्होंने जो मेरे परफॉर्मेंस को नकार देते थे और मेरी तरक्की में बाधा डालते थे लेकिन कुछ चंद लोग अच्छे भी मिलते थे जो मेरे आत्मविश्वास को हमेशा हर परिस्थिति में बढ़ाने का काम करते थे क्योंकि संघर्ष प्राकृतिक रूप से मुझे प्राप्त था ईश्वर का आशीर्वाद था तो आत्मबल कभी भी मैंने कमजोर नहीं किया चाहे जैसी भी परिस्थिति आई।।

प्रश्न 4 - आप की पहली जॉइनिंग किस विद्यालय में हुई और काम करने का कैसा माहौल होता था?

उत्तर 4 - मेरी पहली जोइजिंग अपने ही मोहल्ले के एक विद्यालय में हुई और 9 साल मैंने वहां पर छोटे बच्चों के साथ समय बिताया व पढ़ाया। ऐसे में वहां पर 9 साल बाद जो मैंने अनुभव किया कि जो प्रोफेशनल इंस्टीट्यूट होते हैं वह प्रोफेशनल ही होते हैं जब तक आप उनके लिए उपयोगी है तब तक वह आपको उपयोग में लेंगे जैसे ही आप अपने हक की आवाज उठाते हैं वह आप को निकाल बाहर कर देते हैं यह मेरे लिए एक पहला ऐसा अनुभव था जिसके कारण मैं अपनी लड़ाई को इलाहाबाद कोर्ट तक लेकर गई और जो ग्रेच्युटी फॉर द टीचर के अधिकार के लिए मैं पहली ऐसी नजीर बनी कि पूरे उत्तर प्रदेश में प्राइवेट टीचर को ग्रेजुएटी मिलने का प्रावधान आरम्भ हुआ उस दौरान 2011से 2013 तक  संघर्ष के दौरान साल भर तक अवसाद की स्थिति से भी गुजरी तभी योग के बारे में जानकारी हुई पतंजलि योगपीठ से जुड़ी योग आसन प्राणायाम के जरिए मैं अवसाद से बाहर आई और तब से लगातार योग का लाभ लेते हुए दुसरो को भी जनजागरण कर रही हूँ!!

प्रश्न 5- वर्तमान में कोविड 19 कोरोना के इस वैश्विक संकट में आप क्या कहना चाहती है ??

उत्तर 5- आज जब पूरे विश्व मे कोरोना महामारी के कारण सभी मानवों में एक प्रकार से भय व्याप्त होने लगा उसी समय माननीय प्रधानमंत्री  जी का देश के प्रति राष्ट्र के नाम संबोधन सुना तो हम जैसे कार्यकर्ताओं को लगा कि इस महामारी संकट को दूर करने में हमारी भूमिका क्या हो सकती है? चिंतन मंथन के बाद हमने स्वयं निर्णय लिया कि प्रतिदिन समाज को जागरूक करने के लिए नियमित रूप से सायं 5:30 से 6:15 बजे तक लाइव फेसबुक पर योग की सेवा दूंगी तब से लगातार लाइव फेसबुक के माध्यम से योग ,प्राणायाम, आसन,आयुर्वेद, विचार,साहित्य,संगीत एवं भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाते हुए उनके बताये हुए मार्ग पर चलते हुए जनजागरण लाने का प्रयास कर रही हूं!!

 साथ ही घर पर बनाये लगभग 1000 मास्क,मोहल्लों में सेनेटाइज़ेशन व राशन वितरण के माध्यम से सेवा कार्य कर इसे लगातार जारी रखा है ।।

प्रश्न6-6- आपके योग के लाइव कार्यक्रम से कितने लोग और कहाँ कहाँ के लोग लाभ ले रहे हैं? 

 उत्तर-6-मुझे यह बताते हुए अत्यधिक हर्ष का अनुभव हो रहा है कि प्रधानमंत्री जी के बताये हुए मार्ग से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जापान के टोक्यो ,नीदरलैंड से भी महिलाएं हमसे जुड़ रही हैं एवं विदेश के साथ-साथ भारत में राजस्थान, कुरुक्षेत्र, दिल्ली,गुजरात, चेन्नई,पश्चिम बंगाल, आसाम,उत्तर प्रदेश सहित अनेको राज्यों के लोग शारीरिक ,मानसिक,आध्यात्मिक,

भावनात्मक रूप से तनाव,अवसाद से मुक्ति पाते हुए अपनी रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हुए लगातार लाभान्वित हो रहे हैं और आपके दिए गए स्लोगन ,"घर मे ही रहे ,सुरक्षित रहें" और "जान है तो जहांन हैं"  एवं आरोग्य सेतु एप के द्वारा अपनी जागरूकता बढाते हुए अपने वीडियो,आडियो और लिखित संदेशो  के माध्यम से लगातार संदेश भेज रहे है 

प्रश्न-7- अभी तक आपने  योग की सेवा कहां कहाँ सेवा दी ??

उत्तर-7- मैं बताना चाहूंगी कि विगत कुछ वर्षों में योग की सेवा देते हुए जिसमें एनटीपीसी मेजा, अनेकों विद्यालय, विश्वविद्यालय, माघ व कुंभ मेला प्रयागराज, गांव ,मोहल्ले ,मलिन बस्तियां, पार्क, यूनाइटेड इंस्टीट्यूट ऑफ प्रयागराज, आईटीआई कॉलेज नैनी प्रयागराज एवं अनेकों जगहों पर लगातार योग का प्रचार प्रसार करते हुए बालिका एवं महिला सशक्तिकरण पर कार्य कर रही हूं !!

 मुझे यह प्रेरणा प्रधानमंत्री जी के योग के आवाहन पर मिली जब प्रथम बार 2014 में आपने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून  2015 की घोषणा की तभी से मेरी सक्रियता योग को लेकर और अधिक बढ़ गई । गत वर्षो में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का निम्नलिखित जगहों पर कार्यक्रम देने का भी अवसर प्राप्त हुआ।

 21 जून 2015 पतंजलि योगपीठ,प्रयागराज

 21 जून 2016 भारत सरकार आयुष मंत्रालय,प्रयागराज

21 जून 2017 एनटीपीसी मेजा प्रयागराज

 21 जून 2018 प्रयागराज प्रशासन

 21 जून 2019  प्रोफेसर रज्जू भैया राज्य विश्वविद्यालय,मेजा एनटीपीसी एवं अर्पित सेवा संस्थान ।।

प्रश्न 7- इसके लिए आप किसे श्रेय देना चाहेंगी?

उत्तर-7- माननीय प्रधानमंत्री जी का 17 मार्च 2020 को जनता कर्फ्यू और 24 मार्च लॉक डाउन का उदबोधन सुना तभी ये प्रेरणा मिली कि हमे भी कुछ करना चाहिए और 31 मई 2020 को "मन की बात" सुना उन्होंने योग का विषय रखा और लाइव  सोशल मीडिया के माध्यम से सेवा देने वालों की चर्चा की तो हमारे जैसे सभी कार्यकर्ताओं को इस दिशा में कार्य करने की और अधिक प्रेरणा मिली और इसको लगातार सेवा देने का संकल्प और भी मजबूत हुआ मोदी जी के दो दिए गए शब्द "संकल्प और संयम" इस कार्य मे और शक्ति प्रदान करते हैं मेरे स्तर से यह सेवा लगातार जारी है!! 

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