नागरिक पत्रकारिता : एक विचार जिसका समय आ गया है
मुख्यधारा के मीडिया के लोकतांत्रिकरण और वैकल्पिक मीडिया के आंदोलन से जुड़ी है नागरिक पत्रकारिता

नागरिक पत्रकारिता में कैसे योगदान कर सकते है

प्रत्येक नागरिक आगे आ सकता है, अपने अनुभवों को साझा कर सकता है या उन विषयों के बारे में बात कर सकता है जिसने उनका विशेष ध्यान आकर्षित किया हो। जागरूकता पैदा करने की और एक स्वच्छ समाज बनाने की भूमिका केवल पत्रकारों तक ही क्यों सीमित करें? द यूपी न्यूज़ वेबसाइट हर नागरिक को विश्वसनीयता के साथ अपनी राय जनता को पेश करने के लिए एक मंच प्रदान करती है।

कौन योगदान कर सकता है

आप एक युवा, बढ़ते हुए बच्चे, एक अनुभवी वरिष्ठ नागरिक या एक निपुण गृहिणी हो सकते हो; आपको जरूरत है सिर्फ एक आंतरिक शक्ति की और अपने विचार स्पष्ट करने की तीव्र इच्छा की। आपके विचारों को अधिक पोषित करने के लिए ‘द यूपी न्यूज़’ मौजूद है। इस पहल के पीछे का मूल उद्देश्य एक व्यक्ति के विचार को बाहर लाना है। इस स्थान पर सच्चाई प्रस्तुत करने के लिए किसी डिग्री की ज़रूरत नहीं है।

लेख सहभाजन

साहित्य की बात ऐसी है कि वह दो बार पढ़ा जाएगा, लेकिन पत्रकारिता एक ही बार में अवशोषित हो जाएगी। पत्रकारिता की शक्ति को समझने के लिए इसका अभ्यास किया जाना चाहिए। नागरिक पत्रकारिता आपको एक मंच प्रदान करता है जहाँ आप अपनी कलम के साथ आपके विचार उठा सकते हैं। नागरिक पत्रकारिता पर आप अपने लेखन की कृति का योगदान दे सकते हैं।

नागरिक पत्रकारिता : संभावनाएं और चुनौतियां

द यूपी न्यूज़ प्लेटफार्म के माध्यम से अपनी खबर को आम जनता तक पहुंचाए भारत में नागरिक पत्रकारिता की अभी उस तरह से शुरूआत नहीं हुई है जैसे दुनिया के कई देशों में उसने अपनी अलग पहचान बनाई है। इसके बावजूद भारत में नागरिक पत्रकारिता की संभावनाएं असीमित हैं। निश्चय ही इन संभावनाओं के द्वार खोलने के लिए पहले संगठित नागरिक समूहों और आंदोलनो को आगे आना पड़ेगा। यह सचमुच अफसोस और चिंता की बात है कि देश में नागरिक आंदोलनो और नागरिक समाज के संगठनो के विस्तार के बावजूद उनकी चिंता और कार्यक्रमों के दायरे में व्यापक समाज के साथ सूचनाओं के आदान-प्रदान और अपने मुद्दों और सरोकारों को एजेंडे पर लाने की वैसी कोशिश नहीं दिखाई पड़ती है जिसकी जरूरत काफी अरसे से महसूस की जा रही है।

निश्चय ही, नागरिक आंदोलनो और संगठनों को इस ओर ध्यान देना पड़ेगा। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में ऐसी कुछ पहलकदमियां हुई हैं लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। इस सिलसिले में सूचना के अधिकार ने नागरिक पत्रकारिता के लिए नए रास्ते खोल दिए है। दुनिया के और देशों में नागरिक पत्रकारिता को लेकर किए जा रहे प्रयोगों से भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है।

मुख्यधारा के मीडिया में नागरिक पत्रकारिता का हस्तक्षेप कई रूपों में सामने आ रहा है। उसका एक रूप तो यह है कि समाचार माध्यम अपने वेबसाइट पर कुछ रिपोर्टों, लेखों, संपादकीयों और खबरों को पाठकों की टिप्पणियों के लिए खोल रहे हैं। पाठक इन रिपोर्टों आदि को पढ़ने के बाद उस पर अपनी टिप्पणी दर्ज कर सकते हैं और साथ ही अन्य पाठकों की टिप्पणियों पर भी चर्चा कर सकते हैं। इसके अलावा समाचार माध्यम अपने पाठको को इन रिपोर्टों आदि की रेटिंग करने के लिए भी कह रहे हैं।

मुख्यधारा के समाचार माध्यमों में इसका एक और रूप इस तरह भी सामने आ रहा है जिसमें समाचार माध्यम अपने पाठको को अपने किसी प्रोफेशनल रिपोर्टर या लेखक की खबर, रिपोर्ट और फीचर पर न सिर्फ टिप्पणी करने के लिए बल्कि उसमें कुछ नयी जानकारियां या सूचनाएं जोड़ने के लिए कह रहे हैं। इसके जरिए समाचार माध्यम दरअसल अपने पाठको और दर्शकों को यह मौका दे रहे हैं कि वे किसी घटना या मसले पर उसकी कवरेज को और व्यापक और सघन बना सकें।

तात्पर्य यह कि नागरिक पत्रकारिता में असीमित संभावनाएं हैं। लेकिन उसके सामने चुनौतियां भी कम नहीं है। मुख्यधारा के मीडिया की सबसे बड़ी शिकायत ही यह है कि नागरिक पत्रकारिता, पत्रकारिता के कई बुनियादी सिद्धांतों जैसे वस्तुनिष्ठता, तथ्यपरकता, निष्पक्षता और संतुलन आदि का ध्यान नहीं रखती है। इसमें कुछ हद तक सच्चाई है। कई बार कुछ पाठक ब्लॉग्स आदि में न सिर्फ अश्लील टिप्पणियां करते हैं बल्कि व्यक्तिगत आक्षेप पर भी उतर आते है। इस तरह की प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाने के लिए नागरिक पत्रकारिता में सक्रिय गंभीर और ईमानदार लोगों के अलावा गेटकीपरों को आगे आना पड़ेगा। लेकिन इस सब के बावजूद नागरिक पत्रकारिता को अब रोक पाना संभव नहीं है।

शासन प्रशासन को नीद से जगा दें, जब बात हो सत्य की, भ्रष्टाचार की, इन्साफ की, आम जन की।

हमारे प्लेटफार्म के माध्यम से अपनी खबर को आम जनता तक पहुंचाए  

यहाँ क्लिक करे और नागरिक पत्रकार बने

नागरिक पत्रकार बने

YOUR REACTION?



फेसबुक वार्तालाप